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प्रदेश कांग्रेस अब भी पॉलिटिकली कनफ्यूज ….

रायपुर । प्रदेश कांग्रेस अब भी पॉलिटिकली कनफ्यूज है। बिना प्लानिंग के एक साथ सब वोटरों को साध लेने की बचकानी कोशिश में उलझे हुए हैं। पार्टी नेता अब भी समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्हें वोटरों को रिझाने के लिए क्या करना होगा। सूबे की कांग्रेसी सियासत मंदिर, दर्शन और पूजा कर्मकांडों के इर्द-गिर्द घूम रही है। जबकि पीसीसी में अहम पद एसटी, एससी और ओबीसी को दे दिये हैं। ब्राम्हण, मुसलमान, इसाई और जैन समाज की पूरी तरह अनदेखी कर दी गई है। महज दिखावे के लिए ही सहीं इक्का-दुक्का पद औपचारिकता के लिए दिये गए हैं पर वो भी तीसरी-दूसरी पंक्ती के हैं।
कई दिग्गज ब्राम्हण नेताओं का प्रदेश कांग्रेस में खासा योगदान रहा है। आज भी सूबे की सियासत में ब्राहम्ण नेता और मतदाताओं की अहम भूमिका रहती है। इनके साथ ही मुस्लिम और क्रिश्चियन वोटरों की पहली पसंद कांग्रेस है। दोनों ही समाजों के आला नेता और अगुवा प्रदेश कांग्रेस में साइड लाइन कर दिये गये हैं। पार्टी नेताओं के सलाहकार प्रदेश में आदिवासी और दलित वोटरों को ही साधना सबसे बड़ा काम समझते हैं। जबकि पहले से ही इन वर्गों के आला नेता भाजपा और जनता कांग्रेस जे ने साध लिया है। इनके लिए योजना बनाकर और एजेंडा तैयार कर मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी मतदाताओं को टच कर चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस को ब्राम्हण, मुस्लिम और इसाई मतदाताओं को रिझाना चाहिए था। लेकिन पीसीसी में पद देते वक्त सबसे ज्यादा मुस्लिम वोटरों, फिर इसाई वोटरों की अनदेखी तो किये ही ब्राहम्ण नेताओं को भी डंप कर दिया है।
जिन्हें समिति और दलों में तवज्जो दी गई है वो डीसिजन मेकिंग पोस्ट नहीं है। आदिवासी-दलितों और ओबीसी को पार्टी में आला पद देकर नवाजने वाले पूजा, दर्शन और चढ़ावा उच्च वर्ग के हिंदु मंदिरों में चढ़ा रहे हैं। इससे साफ हो जाता है कि वोट के लिए दलित नेता और पूजा के लिए उच्च कुलीन वर्ग के खानदानी मंदिर में जाने के बदले बूढ़ी मां और बूढ़ा देव मंदिर जाते तो सियासी नियत पर संदेह नहीं किया जाता।
ब्राम्हणों पर पार्टी के सीनियर का ऐसा व्यंग्य
दो दिन पूर्व कांग्रेस भवन में पीसीसी की नई टीम का गेट टू गेदर हुआ था। जिसमें सभी लीड रोल में ओबीसी, दलित और आदिवासी नेता भी मूड पर थे। इस मौके पर चरणदास महंत ने मजाक ही मजाक में पार्टी की जातिगत रणनीति का भी मखौल उड़ाने से बाज नहीं आए। उन्हों ने नए पदाधिकारियों को बधाई देते हुए पीसीसी चीफ भूपेश बघेल, वर्किंग पीसीसी चीफ रामदयाल उईके और शिव डहरिया समेत सरगुजा राजा व नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव तक को आशिर्वाद दिया। लेकिन महंत ने शैलेष नितिन त्रिवेदी को आशिर्वाद देने से इंकार कर दिया। सभी भौंचक्क ते और बाद में महंत से चुटकी लेते हुए कहा वे ब्राम्हण हैं तो मैं कैसे आशिर्वाद दे सकता हूं। महंत का यह मजाकिया लहजा और शैलेष का बार बार आशिर्वाद मांगने के बाद भी सिर्फ बधाई ही महंत ने दिया आशिर्वाद नहीं।
फिर राजामहंत और बघेल को भूल गए
शैलेष के आशिर्वाद वाले मामले से पहले जब टीएस सिंहदेव पीसीसी की नई टीम का इंट्रो दे रहे थे। तब प्रदेश प्रभारी के दो खास नेताओं श्री महंत और भूपेश बघेल का नाम लेना भूल गये थे। उस वक्त शैलेष नीतिन ने फिर से टोका था कि आप दो नामों को भूल गये हैं, इस पर सिंहदेव ने कहा, वैसे मैं तो बोला था, लेकिन चलिये फिर से बोल देता हूं। भले ही उस वक्त कांग्रेस सभागार में ठहाके गूंजे पर सियासत दानों की इन अदाओं के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

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