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बंधुआ मजदूर मामले में आयोग ने जांच शुरू की

रायपुर। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने ईंट-भट्टे से छुड़ाए गए मजदूरों को उनके हाल पर छोड़ देने और किसी तरह की मदद न देने पर छत्तीसगढ़ और जम्मू-कश्मीर सरकार में जांच शुरू की है। आरोप है कि इन मजदूरों को छुड़ाने के बाद सरकार ने मजदूरो को वापस लौटने का किराया तक नहीं दिया।

अंतरिम राहत दी गई न बंधन मुक्त कराए जाने का कानूनी प्रमाण-पत्र। मजूदरों ने एनएचआरसी को भेजी शिकायत में कहा है कि दिल्ली पुलिस ने उन पर लाठी चार्ज किया। इन बंधुआ मजदूरों में 20 महिलाएं और 41 बच्चे शामिल हैं। एनएचआरसी ने अपने महानिदेशक से दो सप्ताह में मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है।

एनएचआरसी ने महानिदेशक जांच को छत्तीसगढ़ तथा जम्मू कश्मीर के स्थानीय आयुक्त से संपर्क करने को भी कहा है ताकि इन मजदूरों को घर भेजा जा सके। दिल्ली पुलिस आयुक्त से लाठी चार्ज के मामले की रिपोर्ट भी मांगी गई है।

ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, जांजगीर चांपा, जैजैपुर, रायगढ़ जिलों के 98 मजदूर जम्मू कश्मीर के सांबा और रियासी जिलों में ईंट भट्टे में बंधुआ मजदूरी कर रहे थे। इन्हें पिछले महीने 28 दिसंबर को छुड़ाया गया था। 4 जनवरी को जब ये मजदूर लौट रहे थे तो दिल्ली में लाठी चार्ज का शिकार हो गए थे। आयोग ने सांबा और रियासी के जिला मजिस्ट्रेटों से इन मजदूरों को बंधन मुक्ति का प्रमाणपत्र देने को कहा है।

 

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