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ट्रैक के निरीक्षण में हमारे पास महज एक टार्च तक नहीं है- साहब,

 रायपुर। गैंगमैन बोले- अरे साहब, कैसे ट्रैक की सुरक्षा करें, जब रात में ट्रैक के निरीक्षण में हमारे पास महज एक टार्च तक नहीं है? कहने के बाद भी आज तक सभी को टार्च नहीं मिल पाई है। उनकी दलील थी कि ऐसे हालात में ट्रैक पर गड़बड़ी होने पर उन्हें ज्ञात ही नहीं हो पाता है। गैंगमैनों ने कहा कि जंगल और सुनसान इलाकों में टार्च नहीं होने से उनकी भी जान को जोखिम है। यही नहीं, पेट्रोलिंग के लिए डीजल आदि भी समय से नहीं दिया जाता है।

गैंगमैन ने रेलवे बोर्ड अध्यक्ष अश्वनी लोहानी से कही। लोहानी उस वक्त रेलवे स्टेशन का निरीक्षण कर रहे थे। इनके आगे-पीछे भागते-हांफते मंडल के अफसरों के हाथ-पांव उस समय फूल गए, जब प्लेटफॉर्म नंबर एक पर पहले से ही 50 गैंगमैनों की टीम ने बोर्ड अध्यक्ष को अचानक घेर लिया।

वहां उन्होंने अपना दुखड़ा सुनाने के साथ ही सवालों की बछौरा कर दी। बहरहाल बोर्ड अध्यक्ष ने बड़े ही शांत और शालीनता से उनकी समस्याओं को सुना और मौके पर मौजूद अधिकारियों को तलब कर लिया। सबके सामने ही उन्होंने तत्काल दूर करने के निर्देश दिए। इन्हीं शिकायतों में एक बड़ी आश्चर्यजनक बात सामने आई तो बोर्ड अध्यक्ष भी चौंक पड़े।

गैंगमैनों ने कहा कि साल में सिर्फ एक बार ही जूते दिए जाते हैं, जो 6 माह में ही फट जाते हैं। इसके बाद जब वह ट्रैकों की जांच करने के लिए पटरियों पर चलते हैं तो उनके पैर जख्मी हो जाते हैं। इनकी पीड़ा को सुनने के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों को बुलाकर वस्तु स्थति जानी, लेकिन मिली दलीलों से वे संतुष्ट नहीं दिखे।

इसके बाद एक फिर गैंगमैनों ने मिल रही सुविधाओं के अलावा मांग की, 20 साल से नौकरी कर रहे हैं, लेकिन विभागीय परीक्षा में पास होने के बाद भी प्रमोशन नहीं दिया गया। जिस संबंधित अधिकारी ने कहा कि गैंगमैनों की संख्या कम है, गैंगमैनों की भर्ती प्रक्रिया पूरा किए जाने के बाद इनके प्रमोशन की मांग पूरी कर दी जाएगी।

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