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गोंडवाना एक्सप्रेस डेंजर सिग्नल से आगे निकली, बाल-बाल बचे यात्री

बिलासपुर। दिल्ली से रायगढ़ पहुंचने वाली गोंडवाना एक्सप्रेस शनिवार रात डेंजर सिग्नल से 5 सौ मीटर आगे निकल गई। घटना रात 8:42 बजे सक्ती आईबी सिग्नल पर हुई। ओवरशूट की सूचना मिलने ही जोन में हड़कंप मच गया। ड्राइवर को तत्काल मेडिकल जांच के लिए भेज दिया गया।

रेलवे बार्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी के निरीक्षण पर बिलासपुर आने से पहले बड़ी लापरवाही सामने आई है। दिल्ली-रायगढ़ गोंडवाना एक्सप्रेस के ड्राइवर ने रेड सिग्नल पार कर दिया। ड्राइवरों को वॉकी-टॉकी पर जानकारी दी गई कि वे डेंजर(सिग्नल) पार कर गए हैं। इसके बार ड्राइवर ने ट्रेन रोक ली। लेकिन अफसरों से आदेश लिए बिना ही दूसरी बार ट्रेन आगे बढ़ा दी। अफसरों ने लाइन क्लीयर रखी और ट्रेन को सक्ती स्टेशन में कंट्रोल कराया। यहां से ट्रेन को दूसरे ड्राइवर के साथ रात 9:48 बजे रायगढ़ के लिए रवाना किया गया।

खबर है कि ट्रेन ड्राइवर एके पसायत ने बीते 5 सालों से ट्रेन नहीं चलाई है। उन्होंने मालगाड़ी ड्राइवर रहते हुए सिग्नल ओवरशूट किया था। सजा के तौर पर उन्हें संटर बनाया गया। ये सजा तीन महीने पहले समाप्त हुई है। ओवरशूट की घटना के बाद रेलवे में हड़कंप मच गया। शनिवार देर रात तक अधिकारियों भी रवाना हो गए। इन सबके बीच सीआरबी श्री लोहानी सोमवार को बिलासपुर दौरे पर आने वाले हैं।

ड्राइवर और गार्ड की जांच

ओवरशूट की घटना सामने आने के बाद रेलवे ने ड्राइवर, असिस्टेंट ड्राइवर और गाइड पर जांच बिठा दी है। सीआरबी निरीक्षण से पहले और रेड सिग्नल पार करने की इस घटना ने अधिकारियों की भी चिंता बढ़ा दी है। मालूम हो कि पिछले महीने ही दूरंतो एक्सप्रेस के ड्राइवर ने ओवरशूट किया था। मामले में जांच पूरी हो गई है।

गुड्स के बाद सीधे मेल एक्सप्रेस

नियमानुसार ड्राइवर पसायत को गुड्स ट्रेन का ड्राइवर बनाया जाना था। लेकिन उन्हें सीनियर डीईईओपी आरबी मिश्रा के करीबी होने का फायदा मिला। सीधे मेल एक्सप्रेस थमा दी गई। सीनियर डीईईओपी ने ही दोषी ड्राइवर को 1 जनवरी 2018 को ट्रेन चलाने योग्य करार दिया था। ड्राइवर पसायत सजा के बाद पहली बार ट्रेन(गोंडवाना) चला रहे थे। उन्होंने बिलासपुर से ड्यूटी शुरू की थी। 74 किलोमीटर का ही सफर किया था कि सिग्नल ओवरशूट हो गया।

ड्राइवर को नहीं दिखा सिग्नल

रेल अधिकारियों का कहना है कि ड्राइवर एके पसायत और असिस्टेंट ड्राइवर एचके साहू को रेड सिग्नल दिखा ही नहीं और वे ट्रेन दौड़ाते रहे। यह एक गंभीर मामला है। जांच के बाद असलियत सामने आएगी।

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