ताज़ा खबर

प्रशासन आदिवासी बच्चों को राइटिंग सुधरवाने के गुर सिखाएगी

दुर्ग। परीक्षा में खराब राइटिंग से नंबर कटते हैं। इसलिए अंक बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन आदिवासी छात्रावासों के बच्चों को राइटिंग सुधरवाने का इंतजाम किया है। इन बच्चों को राइटिंग सुधरवाने के गुर सिखाए जाएंगे। दुर्ग जिले में 10 आदिवासी छात्रावास है। 5 छात्रावास 20-20 सीटों के और 5 छात्रावास 50-50 सीटर हैं। यहां दूरस्थ अंचल के आदिवासी छात्र और छात्राएं रहती है। इन बच्चों की लिखावट बेहतर होने से उन्हे परीक्षा में और ज्यादा अंक आने की उम्मीद है। इसलिए यहां के बच्चों को राइटिंग सुधरवाने के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। आदिवासी छात्रावास के बच्चों को राइटिंग सुधारने की तकनीक सिखाने के लिए जिला प्रशासन उन्हे मुफ्त में पुस्तक उपलब्ध कराएगा। इस पुस्तक की खासियत यह होगी कि पहले से ही शब्द डॉट डॉट सिस्टम से लिखे होंगे। उस पर पेसिंल चलाकर बच्चे राइटिंग सुधारने का अभ्यास करेंगे। अंग्रेजी में स्पेलिंग सुधारने के लिए इसी तरह की बुक्स दी जाएगी। इसके अलावा कापी और राइटिंग मटेरियल भी इन बच्चों को प्रशासन देगी। छात्रावास के बच्चों की राइटिंग सुधरी कि नहीं इसकी मानिटरिंग छात्रावास की अधीक्षिकाओं को करनी है। इसलिए सभी छात्रावास की अधीक्षिकाओं को राइटिंग कैसे सुधारवाना है इसकी तकनीक सिखाएंगे। बच्चों को पूरे एक महीने तक राइटिंग सुधारने की तकनीकी सिखाई जाएगी। प्रशासन ने इसके लिए राइटिंग सुधारने में दक्ष एक एनजीओ की मदद से इस कार्य को अंजाम देगा। यह होगा बच्चों को फायदा सूत्रों के मुताबिक आदिवासी छात्रावास में रहने वाले बच्चे ग्रामीण इलाके की है।
और उन्हे बोर्ड सहित प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होती है। इन परीक्षाओं में मूल्याकंन करने वाले शब्द या अक्षर अस्पष्ट होने पर नंबर में कटौती कर देते हैं। इसकी वजह से इस वर्ग की छात्राओं का नंबर कम आता है और वे उच्च संस्थानों में प्रवेश लेने के न्यूनतम दायरे से बाहर हो जाते हैं। एक या दो अंक कम होने से भी ये चूक जाते हैं। राइटिंग सुधार के लिए ट्विनसिटी में कई निजी संस्थान विशेष कोचिंग ही देती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *