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माननीयों’ के निधन की सूचना तत्काल दें

प्रशासन विभाग (जीएडी) ने इस संबंध में कलेक्टरों के साथ ही सभी संभाग आयुक्तों को भी पत्र जारी किया है।

इसमें संसद के साथ ही विधानसभा सचिवालय को भी अविलंब जानकारी देने को कहा गया है। अफसरों के अनुसार मौजूदा व पूर्व सांसद व विधायकों के निधन की सूचना तत्काल संसद व विधानसभा सचिवालय को तुरंत देने की जिम्मेदारी संबंधित कलेक्टरों की है।

इस संबंध में 2005, 2010, 2012 और 2015 समेत समय-समय पर निर्देश भी जारी किया गया है। इसके वाबजूद समय पर निधन की सूचना नहीं मिलना गंभीर है। इसी वजह से संभाग आयुक्तों और कलेक्टरों को रिमाइंडर जारी किया गया है। इसमें समय पर सूचना नहीं मिलने का भी जिक्र किया गया है।

जीएडी की विशेष सचिव रीता शांडिल्य के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र में कहा गया है कि इस संबंध में स्पष्ट निर्देश के बावजूद कहीं-कहीं प्रभावि व्यवस्था का आभाव है, यह स्थिति उचित नहीं है। भविष्य में ऐसा न हो। इस वजह से जारी करना पड़ा पत्र दो बार सांसद रहे पुस्र्षोत्तम लाल कौशिक के निधन की सूचना समय पर संसद के सचिवालय को नहीं पहुंच पाई।

इसी वजह से इस महीने शुरू हुए शीतकालीन सत्र के पहले दिन श्रद्धांजलि में कौशिक का उल्लेख नहीं हुआ। इसी वजह से सियासी बयानबाजी तेज हो गई थी।

विपक्ष ने इसे सरकार की बड़ी चूक करार दिया। यह है आदेश लोकसभा, राज्यसभा के पूर्व व वर्तमान सांसदों के साथ ही अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व विधायक व छत्तीसगढ़ के पूर्व व मौजूदा विधायकों के निधन की सूचना तत्काल संसद और विधानसभा सचिवालय को अविलंब देना है।

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