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स्वागत स्पीच में मोदी के गरीब vs कांग्रेस के अमीर!

वेंकैया नायडू 13वें उपराष्ट्रपति के तौर पर शुक्रवार को शपथ लेकर राज्यसभा का कामकाज संभालने पहुंचे। इसके बाद, सत्ताधारी बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस की ओर से उनके स्वागत में स्पीच दी गई। पीएम नरेंद्र मोदी ने सरकार की ओर से, जबकि विपक्ष की ओर से कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद ने स्पीच दी। मोदी ने देश के सभी सर्वोच्च पदों- राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री आदि पर गरीब बैकग्राउंड के लोगों के पहुंचने के लिए लोकतंत्र की तारीफ की। वहीं, गुलाम नबी आजाद ने कहा कि देश की आजादी और बाद में मजबूत लोकतंत्र की नींव रखने में अमीरों और करोड़पति लोगों के योगदान को भी नहीं भूलना चाहिए।

अमीर मोतीलाल नेहरू से लेकर गांधी का जिक्र 
गुलाम नबी आजाद ने अमीरों का उदाहरण देते हुए पंडित मोती लाल नेहरू का जिक्र किया। आजाद ने कहा कि पंडित मोतीलाल नेहरू इतने अमीर थे कि आज उनकी वकालत की हर दिन की प्रैक्टिस 6 से 7 करोड़ रुपये के बीच होती। आजाद के मुताबिक, उन करोड़पति और अमीर लोगों को भी याद किया जाना चाहिए, जिन्होंने अपना परिवार और जीवन देश की आजादी के लिए समर्पित कर दिया। आजाद ने महात्मा गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी काफी समृद्ध परिवार से थे, जो वकालत की प्रैक्टिस करने के लिए साउथ अफ्रीका भी गए। आजाद ने कहा कि देश की आजादी के लिए गांधी ने अपने कपड़े तक उतार फेंके। आजाद ने कहा, ”इसमें गरीबी अमीरी का सवाल नहीं है। …इनके पीछे एक ताकत है, वो लोकतंत्र है।’ उन्होंने कहा, ‘सुभाष चंद्र बोस, गांधी जी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरकार पटेल, मौलाना आजाद, को कौन भूल सकता है, ऐसे लोग जो संपन्न थे, उन्होंने देश के लिए कुर्बानी दी और ऐसा संविधान दिया कि आज कोई भी कुछ भी बन सकता है।’

आजाद ने नायडू को याद दिलाया कर्तव्य
गुलाम नबी आजाद ने नायडू को पद संभालने की बधाई तो दी लेकिन साथ ही उनका कर्तव्य भी याद दिलाया। याद दिलाया कि भले ही कभी वह एक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, लेकिन इस पद पर रहते हुए उन्हें न्याय करना है। आजाद ने कहा कि जिस पद पर नायडू बैठे हैं, उस सीट के पीछे एक तराजू है, जो बार-बार जज, स्पीकर या राज्यसभा चेयरमैन को याद दिलाता है कि वह निष्पक्ष है। आजाद ने कहा कि इस पद पर इंसान सिर्फ इंसान होता है। न्याय करते वक्त न धर्म होता है, न ही उसकी पार्टी होती है। आखिर में आजाद ने कहा, ‘ये जगह अल्लाह ने आज आपको नवाजा है। हम आपकी लंबी आयु की कामना करते हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि सदन के नेता परंपराओं को इसलिए भी याद दिलाते हैं ताकि आगे भी वे परंपराएं बनी रहें।

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